अवैध वसूली की खबरों पर तिलमिलाए बक्सर RPF प्रभारी, खोया आपा
बीते दिनों अवैध वसूली के मामले में SP ने लगाई थी फटकार, अब RPF प्रभारी के रवैये पर उठे गंभीर सवाल
बक्सर। रेलवे स्टेशन और उसके आसपास कथित अवैध वसूली को लेकर लगातार सामने आ रही खबरों ने अब RPF महकमे की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि अवैध वसूली से जुड़ी खबरों से नाराज RPF प्रभारी कुंदन कुमार ने अपना आपा खो दिया और पत्रकारों के साथ कथित तौर पर अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया। मामले के सामने आने के बाद पुलिस-प्रशासनिक महकमे में भी चर्चा तेज हो गई है।। वेंडरों से पैसे वसूलता दलाल
सूत्रों के अनुसार, बक्सर रेलवे स्टेशन परिसर और आसपास अवैध गतिविधियों तथा कथित वसूली को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित की जा रही थीं। इन खबरों में यात्रियों, वेंडरों और अन्य लोगों से कथित तौर पर की जा रही अवैध वसूली के आरोपों को प्रमुखता से उठाया गया था। खबरों के सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे थे। इसी बीच RPF प्रभारी की पत्रकारों के प्रति कथित आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल की बात सामने आई है।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि यदि किसी खबर को लेकर RPF प्रभारी को आपत्ति थी तो उसका जवाब तथ्यों और आधिकारिक स्पष्टीकरण के माध्यम से दिया जा सकता था। लेकिन पत्रकारों के साथ कथित रूप से अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने का आरोप पूरे मामले को और गंभीर बना देता है। पत्रकारिता का काम सवाल पूछना और जनता से जुड़े मुद्दों को सामने लाना है। किसी अधिकारी को खबर पसंद नहीं आने पर पत्रकारों को अपमानित करना या दबाव बनाने का प्रयास लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।
गौरतलब है कि बीते दिनों अवैध वसूली से जुड़े एक मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक स्तर से भी संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद उम्मीद थी कि रेलवे परिसर में यात्रियों और वेंडरों से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच होगी और यदि कहीं अनियमितता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लेकिन अब RPF प्रभारी के कथित व्यवहार ने पूरे मामले को एक नए विवाद में ला खड़ा किया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए RPF कमांडेंट ने भी स्पष्ट किया है कि पत्रकारों के साथ अमर्यादित व्यवहार को लेकर जांच कराई जाएगी और आरोप सही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कमांडेंट के इस रुख के बाद अब निगाहें विभागीय जांच पर टिक गई हैं।
सवाल सिर्फ किसी एक अधिकारी के व्यवहार का नहीं है, बल्कि यह भी है कि रेलवे परिसर में यदि अवैध वसूली अथवा किसी प्रकार की अनियमितता की शिकायतें सामने आ रही हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं होनी चाहिए? यदि आरोप गलत हैं तो विभाग को तथ्य सामने रखकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि आरोपों में सच्चाई है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
पत्रकारों को धमकाने, दबाव में लेने या अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने से सवाल खत्म नहीं होते। बल्कि ऐसे रवैये से सवाल और गहरे होते हैं। अब देखना होगा कि RPF कमांडेंट द्वारा कही गई कड़ी कार्रवाई केवल बयान तक सीमित रहती है या वास्तव में जांच के बाद जिम्मेदार अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई होती है।
फिलहाल, इस पूरे प्रकरण ने बक्सर RPF की कार्यशैली, रेलवे परिसर में कथित अवैध वसूली और अधिकारियों के पत्रकारों के प्रति रवैये को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन सवालों का जवाब अब विभागीय जांच और कार्रवाई से ही सामने आएगा।
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