आचार्य किशोर कुणाल जी के निधन पर पूर्व सांसद अश्विनी कुमार चौबे ने व्यक्त की गहरी संवेदना
बक्सर लाईव: पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने प्रसिद्ध समाजसेवी और धर्मनिष्ठ व्यक्तित्व आचार्य किशोर कुणाल जी के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह समाचार अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। आचार्य किशोर कुणाल जी का जीवन सच्ची सेवा, समर्पण और सद्भाव का प्रतीक था। उन्होंने समाज, धर्म और मानव सेवा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया।
श्री चौबे ने कहा, “ईश्वर से प्रार्थना है कि उनकी दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके परिवारजनों एवं प्रियजनों को इस कठिन समय में साहस और धैर्य दें। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बना रहेगा।”
उन्होंने बताया कि उनके परिवार का आचार्य किशोर कुणाल जी से 70 के दशक से आत्मीय संबंध रहा है। पहली मुलाकात जेपी आंदोलन के दौरान हुई थी, जो समय के साथ प्रगाढ़ होती चली गई। हाल ही में अयोध्या में उनसे भेंट हुई थी, जहां उन्होंने राम मंदिर के सामने संचालित 'राम रसोई' में रामभक्तों को भोजन कराने के अपने अनूठे कार्य का परिचय दिया।
आचार्य किशोर कुणाल जी ने श्री राम कर्मभूमि न्यास के महत्व पर चर्चा करते हुए भगवान श्री राम की पराक्रमी मूर्ति स्थापित करने के संकल्प को लेकर अपनी प्रतिबद्धता और सहयोग का भरोसा दिलाया। 2022 में बक्सर सिद्धाश्रम में आयोजित सनातन संस्कृति समागम कार्यक्रम की सफलता पर भी उन्होंने हर्ष व्यक्त किया।
श्री चौबे ने बताया कि आचार्य किशोर कुणाल जी ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक आईपीएस कुणाल, जो उनके जीवन और अनुभवों पर आधारित है, भेंट की थी। यह पुस्तक उनकी महानता, विचारधारा और प्रेरक जीवन को दर्शाती है। उनका निधन न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति है।
हिंदुत्व के प्रति उनकी सेवा अविस्मरणीय रहेगी। उन्होंने बिहार में हिंदुत्व की पुनर्स्थापना और उसे सशक्त बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई। उनका स्वप्न, पूर्वी चंपारण में विराट रामायण मंदिर बनाना, उनके जीवनकाल में पूर्ण नहीं हो सका, लेकिन यह निश्चित है कि यह स्वप्न साकार होगा और उनके नाम को चिरस्थायी बनाएगा।
श्री चौबे ने कहा कि उनका जाना व्यक्तिगत क्षति है, लेकिन उनकी स्मृतियां, विचार और योगदान हमें सदैव प्रेरणा देते रहेंगे। उनका जीवन समाज और देश के लिए आदर्श और प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
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