अतिक्रमण पर चुप्पी, ‘रोटी बैंक’ पर सख्ती—बक्सर में इंसानियत ही बनी निशाने पर”
बक्सर लाईव। बक्सर रेलवे स्टेशन के बाहर जहां एक ओर अतिक्रमण का जाल खुलकर फैला हुआ है, वहीं दूसरी ओर सैकड़ों गरीबों का पेट भरने वाली मानवीय पहल ‘रोटी बैंक’ पर प्रशासनिक सख्ती सवालों के घेरे में है। समाजसेवी ओम जी यादव द्वारा संचालित यह रोटी बैंक अब रेलवे प्रशासन के दबाव में बंद होने के कगार पर पहुंच गया है।
हैरानी की बात यह है कि स्टेशन परिसर के बाहर अवैध स्टैंड में खुलेआम वाहनों का संचालन हो रहा है। जगह-जगह अतिक्रमण ने आम लोगों की आवाजाही तक मुश्किल कर दी है, लेकिन इस पर न तो रेलवे प्रशासन की नजर जाती है और न ही स्थानीय अधिकारियों की। इसके उलट, गरीबों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराने वाली पहल को लगातार हटाने का दबाव बनाया जा रहा है।
ओम जी यादव ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “स्टेशन के बाहर निकल कर देखिए, अतिक्रमण का जाल फैला है। इस पर न रेल प्रशासन बोलेगा, न कोई अधिकारी। निजी ठेकेदार रेलवे परिसर में वेंडरों से लेकर साहब तक के सुख-सुविधाओं का मैनेजमेंट करते हैं, लेकिन उस पर किसी की नजर नहीं जाती।”
उन्होंने आगे चेतावनी दी कि अगर इसी तरह मानवीय कार्यों को निशाना बनाया जाता रहा, तो आने वाले समय में बक्सर के लोग सामाजिक कार्य करने से भी कतराने लगेंगे। यह स्थिति समाज के लिए बेहद चिंताजनक होगी।
स्थानीय लोगों का भी कहना है कि प्रशासन को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए। जहां अवैध गतिविधियों पर सख्ती जरूरी है, वहीं मानव सेवा जैसे कार्यों को संरक्षण मिलना चाहिए। फिलहाल, ‘रोटी बैंक’ को लेकर जारी यह विवाद प्रशासनिक संवेदनशीलता और व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
Comments
Post a Comment